सूर्य षष्टी व्रतं . (छठ पूजन महत्व )

सूर्यषष्ठी व्रत 26-10-2017 गुरुवार ! व्रतस्य सूर्यार्घ पश्चात पारणा 27-10-2017 शुक्रवार !!
कार्तिक शुक्ल षष्ठी को यह व्रत मनाया जाता है ! इस दिन सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है इस व्रत को करने वाली स्त्रियां धन-धान्य-पति -पुत्र व सुख,समृध्दी से परिपूर्ण व संतुष्ट रहती हैं ! विशेषकर चर्म रोग व नेत्र रोग से मुक्ति मिल सकती है,इस व्रत को निष्ठा पूर्वक करने से पूजा व अर्घ दान देते समय सूर्य की किरण अवश्य देखना चाहिए ! प्राचीन समय में बिन्दुसर तीर्थ में महिपाल नामक एक वणिक रहता था ! वह धर्म-कर्म तथा देवताओं का विरोध करता था ! एक वार सूर्य नारायण के प्रतिमा के सामने होकर मल-मूत्र का त्याग किया,जिसके फल स्वरूप उसकी दोनों आखें नष्ट हो गई ! एक दिन यह वणिक जीवन से उब कर गंगा जी में कूद कर प्राण देने का निश्चय कर चल पड़ा ! रास्ते में उसे ऋषि राज नारद जी मिले और पूछे -कहिये सेठ जी कहा जल्दी जल्दी भागे जा रहे हो ? अन्धा सेठ रो पड़ा और सांसारिक सुख-दुःख की प्रताड़ना से प्रताड़ित हो प्राण- त्याग करने जा रहा हूँ -मुनि नारद जी बोले- हे अज्ञानी तू
प्राण-त्याग कर मत मर भगवान सूर्य के क्रोध से तुम्हें यह दुख भुगतना पड़ रहा है ! तू कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की सूर्य षष्ठी का व्रत रख,-तेरा कष्ट समाप्त हो जायेगा ! वणिक ने समय आने पर यह व्रत निष्ठा पूर्वक किया जिसके फल स्वरूप उसके समस्त कष्ट मिट गए व सुख-समृद्धि प्राप्त करके पूर्ण दिव्य ज्योति वाला हो गया !!
अतः इस व्रत व पूजन को करने से अभीष्ट की प्राप्ति होती है !!
ज्योतिषाचार्य पण्डित राकेश पाण्डेय,विनीत खण्ड,गोमतीनगर, लखनऊ दूरभाष-9839572152

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